सामान्य निर्देशः ( General details )
1. यह एक त्रैमासिक पत्रिका होगी। यह प्रत्येक वर्ष के जनवरी, अप्रैल, जुलाई एवं अक्टूबर में प्रकाशित होगी।
2. लेख या रचनाएँ 1 पृष्ठ से 5 पृष्ठों के मध्य होना चाहिए।
3. पत्रिका में प्रकाशनार्थ अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना की एक टंकित word की soft copy तथा एक PDF प्रति Kruti Dev 010 फाण्ट में प्रेषित करें।
4. समस्त लेख, रचनाएँ या सूचना एतत्सम्बन्धी ई-मेल – nideshak@upsanskrit-nic.in पर अपना पूरा पता एवं स्वयं का फोटो, विषय से सम्बन्धित फोटो के साथ भेजना चाहिए।
5. लेखक स्वयं के ई-मेल द्वारा ही लेख भेजें।
6. निःशुल्क सदस्यता के लिए सदस्यता बटन पर जाकर अपना पूर्ण विवरण भी उपलब्ध कराना अपेक्षित होगा। अन्यथा प्रकाशन सम्बन्धी सूचनाओं से अवगत कराना सम्भव नहीं होगा।
7. ‘पालि कोष्ठक’ में ‘कृति-परिचय’ स्तम्भ के अन्तर्गत प्रकाशित पुस्तकों की समीक्षाएं भी प्रकाशित की जाती हैं, अत: लेखकों तथा प्रकाशकों से कृतियाँ आमन्त्रित हैं।
8. इस पत्रिका में प्रकाशित श्रेष्ठ सर्जना को वर्ष में एक बार चयन कर पुरस्कृत करने पर विचार किया जा सकता है।
9. प्रत्येक लेख पर स्वत्वाधिकार लेखकों एवं सम्पादकों का रहेगा । पत्रिका में प्रकाशित लेख से सम्पादक/प्रकाशक का सहमत होना आवश्यक नहीं होगा। तथ्यों की प्रामाणिकता एवं मौलिकता हेतु लेखक स्वयं उत्तरदायी होंगें।
10. लेखों या रचनाओं के प्रकाशनार्थ चयन सम्पादक एवं परामर्शदात्री समिति के विवेकाधीन होगा।
11. यह संस्कृत, हिन्दी भाषा में प्रकाशित होगी।
12. संस्कृत गद्य लेखन में क्लिष्ट समस्तपद एवं सन्धियों के प्रयोग न्यूनातिन्यून किये जायें।
13. नव प्रवेशियों द्वारा संस्कृत भाषा लेखन में स्खलन स्वभाविक है। विज्ञजनों के परिस्पन्द (fedback) के माध्यम से पत्र/ सुझाव सादर आमंत्रित हैं।
14. पालि कोष्ठक पत्रिका में प्रथम बार लेख प्रकाशन से पूर्व उपलब्ध कराये गये निर्धारित प्रारुप पर एतद्विषयक घोषणा पत्र देना अनिवार्य है कि पत्रिका में प्रकाशनार्थ प्रेषित मेरी मौलिक रचना है तथा किसी भी विवाद की स्थिति में केवल मैं स्वयं उत्तरदायी हुंगा/ हुंगी।
15. पत्रिका से सम्बन्धित समस्त न्यायिक परिवाद क्षेत्र लखनऊ होगा।
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