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  महत्वपूर्ण गतिविधियां  
     
     
 

 

 

 

 

पुस्तकालय-


संस्थान कार्यालय भवन के वृहद् भाग में संस्कृत पुस्तकालय की स्थापना की गई है, जिसमें लगभग 19000 हजार मुद्रित संस्कृत ग्रन्थ तथा लगभग 8000 हस्तलिखित ग्रन्थ हैं। इस पुस्तकालय का उपयोग समीपवर्ती विश्वविद्यालय के शोध छात्रों, प्रशासनिक सेवा के प्रतिभागी अभ्यर्थियों एवं संस्कृतानुरागी विद्वानों द्वारा होता है।

 

व्याख्यान गोष्ठी-


संस्थान द्वारा शंकराचार्य जयन्ती, बुद्ध जयन्ती, व्यास जयन्ती, संस्कृत दिवस, वाल्‍मीकि जयन्ती, कालिदास-जयन्ती एवं गीता जयन्ती आदि के अवसर पर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्कृत विद्वानों के व्याख्यान, गोष्ठी एवं संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। वाल्मीकि जयन्ती के अवसर पर इण्टर/मध्यम कक्षा के छात्र छात्राओं की प्रदेश स्तर की वाद विवाद/निबन्धलेखन/संस्कृत-गीतगेय तथा श्लोक अन्त्यक्षरी प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है।

व्यास महात्सव प्रतिवर्ष गीता जयन्ती (मोक्षदा-एकादशी-मार्ग शीर्ष) से वाराणसी में पन्‍च दिवसीय महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। आगामी पन्च दिवसीय व्यास महोत्सव का शुभारम्भ 28 नवम्बर 2009 को होगा।

 

व्यावहारिक संस्कृत शिक्षण-


संस्कृत संस्थान की यह बहुत लोकप्रिय योजना है। प्रदेश शासन केन्द्र शासन से इस मद में अनुदान प्राप्त होने पर सम्पूर्ण प्रदेश में शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। संस्थान द्वारा आयोजित शिविरों में बाल, वृद्ध, पुरूष एवं महिलायें विशेष रूप से भाग लेते हैं, जिन्हें संस्कृत भाषा का बोलचाल के ज्ञान के साथ ही धार्मिक तथा आध्यात्मिक ग्रन्थों का भी ज्ञान कराया जाता है। इस वर्ष व्यावहारिक संस्कृत शिक्षण के साथ ही पौरोहित्य प्रशिक्षण केन्द्रों के संचालन की भी व्यवस्था की है।

 

शास्त्रार्थ प्रतियोगिता एवं मण्डलीय सम्मेलन-


मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संस्कृत भाषा विकास के लिए उ० प्र० संस्कृत संस्थान की योजना हेतु रू० 16.77 लाख का विशेष अनुदान प्रदेश शासन के माध्यम से प्राप्तव्य है। इन योजना के अन्तर्गत प्रत्येक मण्डल में दर्शन, व्याकरण, साहित्य एवं ज्योतिष विषयों पर शास्त्रार्थ प्रतियोगिता आयोजित की गयी। प्रत्येक मण्डल के प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों की प्रदेश स्तर पर प्रतियोगिता का लखनऊ मुख्यालय में आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीन दिवसीय संस्कृत सम्मेलन में विद्वद्-गोष्ठी, संस्कृत कवि सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। पुन:आगामी वर्ष हेतु भी व्यवस्था की जा रही है।

 

पोरोहित्य कर्म प्रशिक्षण योजना:-


समय-समय पर मानव संसाधन विकास मन्त्रालय भारत सरकार से उ० प्र० शासन के माध्यम से पौराहित्य कर्म प्रशिक्षण केन्द्र चलाये जाते हैं। वर्ष 200-01 में रू. 14.50 लाख की धनराशि पोरोहित्य कर्म प्रशिक्षण केन्द्र चलाये जाने हेतु प्राप्त हुई थी जिससे सम्बन्धित वित्तीय वर्ष में 45 केन्द्रों का सफल संचालन किया गया। पुन: 2001-02 में 55 केन्द्रों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षणार्थी को पोराहित्य कर्म प्रशिक्षक नामक पुस्तक की एक प्रति, रजिस्टर तथा पेन आदि नि:शुल्क दिया जाता है। सम्प्रति इस वर्ष उ० प्र० के विभिन्न जिलों में 35 केन्द्रों का संचालन किया गया है।

 

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम, लखनऊ वर्ष 2011-12 हेतु नियत कार्य योजना

क्र० सं०

कार्यक्रम

आयोजन की तिथि

कार्यक्रम विवरण धनराशि

1.

आद्यशंकराचार्य जयन्ती

08 मई 2011

छात्र/छात्राओं के लघु प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 20000.00

2.

बुद्ध जयन्ती 17 मई 2011 छात्र/छात्राओं के संस्कृत लघु निबन्‍ध प्रतियोगिता 20000.00

3.

गुरू पूर्णिमा 15 जुलाई 2011 5 विद्वानों के सम्मान एवं व्याख्यान 20000.00

4.

संस्कृत दिवस 13 अगस्त 2011 रोजगार सलाह, संस्कृत पत्रकार सम्मेलन 30000.00

5.

बाल्मीकि जयन्ती
क- प्रारम्भिक प्रतियोगितायें 15 जुलाई 30 सितम्बर 2011 प्रदेश के प्रत्येक मंडल में छात्र/छात्राओं के भाषण, गीत एवं श्लोकान्त्यक्षरी प्रतियोगिता लखनऊ में छात्र/छात्राओं की प्रतियोगिता विद्वदगोष्ठी, संस्कृत कवि सम्मेलन 40000.00
ख- महर्षि बाल्मीकि जयन्ती 11, 12 अक्टूबर 2011 60000.00
ग- विद्वदगोष्ठी, कवि सम्मेलन तदैव

6.

धन्वन्तरि जयन्ती 24 अक्टूबर 2011 नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर 10000.00

7.

कालिदास जयन्ती 6 नवम्बर 2011 संस्कृत नाटक प्रतियोगिता 30000.00

8.

व्यास महोत्सव 6 से 10 दिसम्बर 2011 पूर्ववत् वाराणसी  

9.

बसंत पंचमी 28 जनवरी 2012 छात्र/छात्राओं के श्लोक गान 20000.00

10.

सरल संस्कृत संभाषण शिविर (4 X 10000) तीन माह में एक बार 40000.00

11.

शुद्ध वेद पाठ प्रशिक्षण शिविर (4 X 10000) तदैव 40000.00
      कुल धनराशि 330000.00

 

उक्त के अतिरिक्त समय-समय पर विभिन्न विषयों पर पुनश्चर्या विषयों पर पुनश्चर्या/कार्यशाला का आयोजन यथा समय किया जायेगा।

निदेशक