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  प्रमुख योजनाएं  
     
     
 

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ की स्थापना 31 दिसम्बर 1976 को संस्कृत पालि एवं प्राकृत भाषाओं तथा उनके साहित्य के समुचित संरक्षण, प्रोत्साहन एवं विकास के लिये की गयी। संस्थान संस्कृत भाषा के विकास प्रचार व प्रसार एवं संरक्षण के लिये संस्थान अपने स्थापना काल से सदैव प्रयासरत है। संस्कृत संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न योजनायें:-

 

  • पुरस्कार योजना : -संस्कृत संस्थान द्वारा प्रति वर्ष 50 विद्वानों को 2.51 हजार रूपये की विश्वभारती पुरस्कार से लेकर 5.00 हजार तक के नामित पुरस्कार प्रदान की जाती है।
  • इस प्रकार 12.98 लाख रूपये पुरस्कार स्वरूप विद्वानों को प्रदान किया जाता है।

 

ग्रन्थ प्रकाशन :-संस्थान द्वारा अब तक 35 ग्रन्थों का प्रकाशन किया गया है, जिसमें संस्कृत वाडगमय का वृहद इतिहास का प्रकाशन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही साहित्य रत्न मंजूषा ग्रन्थ का प्रकाशन किया गया है। संस्कृत संस्थान द्वारा षाण्मासिक शोध पत्रिका परिशीलनम का प्रकाशन होता है। इसके अतिरिक्त संस्कृत वाड.गमय में महिलाओं का योगदान व स्थान, दर्शन तत्व विमर्श तथा व्याकरण तत्व विमर्श का प्रकाशन किया गया है। पौरोहित्य कर्म प्रशिक्षण, व्यावाहारिक संस्कृत प्रशिक्षण, पुस्तक के संशोधित संस्करण अत्यन्त लोकप्रिय है।

 

पाण्डुलिपि संरक्षण योजना एवं पुस्तकालय:- संस्कृत संस्थान में अतिमहत्वपूर्ण प्राचीन ताड़पत्र, भोजपत्र सहित 8000 हस्त लिखित ग्रन्थ संरक्षित है। संस्थान कार्यालय भवन के वृहद भाग में संस्कृत ग्रन्थों के एक पुस्तकालय की स्थापना की गयी है, जिसमें संस्कृत के लगभग 20000 मुदि्रत तथा 8,000 संस्कृत के हस्तलिखित ग्रन्थ हैं।

 

व्याख्यान गोष्ठी / जयन्ती :- संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष शंकराचार्य जयन्ती, बुद्ध जयन्ती, व्यास जयन्ती, कालिदास जयन्ती, वाल्मीकि जयन्ती,धनन्वतरि जयन्ती, गीता जयन्ती, संस्कृत दिवस समारोह आदि का आयोजन किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों के व्याख्यान एवं गोष्ठी (सेमीनार) आयोजित होते है। साथ ही विधार्थियों में संस्कृत ज्ञान बढ़ाने के लिए विभिन्न शास्त्रीय प्रतियोगितायें तथा आधुनिक स्पद्र्धायें आयोजित कर उनमें से श्रेष्ठ को पुरस्कृत किया जाता है। इसके अतिरिक्त शास्त्र संरक्षण के लिए वैदिक कक्षा वास्तु कक्षा तथा ज्योतिष, कक्षा का भी संचालन एवं विभिन्न विषयों पर कार्यशालाओं का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।

 

ग्रन्थ प्रकाशन अनुदान :- संस्थान द्वारा ग्रन्थ प्रकाशन अनुूदान, पत्र-पत्रिका अनुदान, सार्वजनिक पुस्तकालय को संस्कृत ग्रन्थ सहायता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों हेतु अनुदान प्रदेश शासन से सम्बनिधत मदों में धनराशि प्राप्त होने पर दिया जाता है। वर्तमान में संस्थान सहायता से चार ग्रन्थों का प्रकाशन कार्य किया गया है।


प्रशिक्षण योजना :- संस्कृत संस्थान द्वारा मुख्यालय सहित पूरे प्रदेश में समय-समय पर संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण संस्कृत शिक्षण शिविर के माध्यम से तथा कर्मकाण्ड प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से शुद्ध कर्मकाण्ड कराने का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रदेश में संस्कृत विधालयों में कार्यरत अध्यापकों के लिए रिफे्रशर प्रोग्राम चलाये जाते है।

 

अखिल भारतीय व्यास महोत्सव:- व्यास की कर्मभूमि वाराणसी मे विगत 5 वर्षों से पंचदिवसीय अखिल भारतीय व्यास समारोह का आयोजन किया जाता है। जिसमें सम्पूर्ण देश के संस्कृत विश्वविधालयों तथा संस्कृत संस्थानों के शोधार्थी एवं विद्वान भाग लेते है। प्रतिदिन विद्वतगोष्ठीय, छात्रों की शैक्षिक प्रतियोगिता तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।