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प्रकाशन अनुदान सम्बन्धी नियम
     
     
     
     
  1.

संस्कृत, प्राकृत अथवा पालिभाषा में लिखित केवल उच्च कोटि की नवीन मौलिक कृतियों के प्रकाशन हेतु ही सहायता देने पर विचार किया जायेगा।

     
  2.

केवल ऐसे नए महत्वपूर्ण ग्रन्थों के प्रकाशन के लिए ही सहायता दी जाएगी जिसका अभी तक प्रकाशन न हुआ हो तथा जिनका प्रकाशन संस्कृत/प्राकृत/पालि साहित्य के लिए एक उपलब्धि माना जाए।

     
  3. किसी प्राचीन ग्रन्थ के नवीन वैज्ञानिक ढंग से सम्पादन अथवा उस परनवीन, मौलिक उद्भावनापूर्ण उच्चकोटि की टीका या व्याख्या के प्रकाशन पर भी विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है।
     
  4. प्राचीन ग्रन्थ का सम्पादन या नवीन ग्रन्थ की रचना उच्च कोटि की होनी चाहिए। ग्रन्थ के अनुमोदन के लिए ग्रन्थ की पाण्डुलिपि की एक प्रति संस्थान कार्यालय को भेजना आवश्यक होगा।
     
     
  5. लेखक/प्रकाशक को व्यय का पूरा अनुमान, विस्तृत विवरण तथा प्रस्तावित मूल्य के साथ संस्थान के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करना होगा।
     
     
  6. प्रकाशन सहायता अधिक से अधिक 1000 प्रतियों के मुद्रण हेतु व्ययानुमान पर आधारित की जाएगी तथा सामान्य तया 5000 रू0 या कुल व्ययानुमान के 60 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
     
  7.
लेखक/प्रकाशक को पुस्तक के मुख पृष्ठ पर या किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर यह अंकित कराना आवश्यक होगा कि पुस्तक का प्रकाशन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के आर्थिक सहयोग से किया गया है।
     
  8. पुस्तककाउचितमूल्य संस्थान के अनुमोदनसेहीनिश्चितकियाजाएगातथानिर्धारितमूल्य सेअधिकपरपुस्तक न बेचीजाएगी।
     
  9. प्रकाशन सहायत का 50 प्रतिशत प्रथम मुद्रित फार्म की प्राप्ति पर तथा शेष 50 प्रतिशत अन्तिम मुद्रित फार्म की प्राप्ति पर दिया जाएगा। यह सहायता तीन किश्तों में भी सुविधानुसार दी जा सकती है।
     
  10. लेखक/प्रकाशक को प्रकाशित ग्रन्थ की 30 प्रतियां निःशुल्क संस्थान को भेंटकरनी होगी।