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    यथासंशोधित एवं परिवर्धित-2015
(शासनादेश सं0 115/21-3-07 सं.सं. 34/06 दि. 11मई 2007 तथा
शासनादेश सं. 92/21-3-2010-सं.सं.-34/2006 दि. 16 जून 2010 शासनादेश सं0 20/21-3-2015 सं.सं. 34/2006 दिनांक 5 फ़रवरी 2015 को सम्मिलित करते हुए संशोधित)
   
पुरस्कार नियमावली
     
   

1. यह नियमावली उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान पुरस्कार पुनरीक्षित एवं पुनर्गठित नियमावली 2006 कहलायेगी।।


2. यह नियमावली तुरन्त प्रभावी होगी।


3. यह नियमावली संस्कृत में रचनात्मक लेखकों को प्रोत्साहित करने एवं दीर्घकालीन संस्कृत भाषा की सेवा के लिये संस्कृत के विद्वानो को प्रोत्साहित, पुरस्कृत एवं सम्मानित करने की योजना के संबंध में लागू होगी। पालि एवं प्राकृत रचनाकारों को भी इस योजना में सम्मिलित करने के लिये इस नियमावली में प्राविधान किया जाता है।


4. विश्वभारती एवं नामित ग्रन्थ पुरस्कारों का पात्रता क्षेत्र सम्पूर्ण भारत होगा। शेष सभी पुरस्कारों के चयन के लिये यह आवश्यक होगा कि संबंधित विद्वान् का जन्म उत्तर प्रदेश की वर्तमान सीमाओं में हुआ हो अथवा कम से कम 10 वर्षों से उत्तर प्रदेश में निवास कर रहा हो। पुरस्कारों की प्रवृत्ति, धनराशि एवं पुरस्कारों की संख्या


5. वर्तमान में शासन द्वारा स्वीकृत एवं शत प्रतिशत वित्त पोषित पुरस्कारों की प्रवृत्ति, संख्या एवं धनराशि में वृद्धि शासन की स्वीकृति के उपरान्त हो सकती है।


1- विश्वभारती पुरस्कार        एक   रु0   5,01,000.00
2- महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार  एक   रु0   2,01,000.00
3- विशिष्ट पुरस्कार             पाँच    रु0   1,01,000.00
4- नामित पुरस्कार              पाँच   रु0  51,000.00
5- वेद पण्डित पुरस्कार         दस    रु0   51,000.00
6- विशेष पुरस्कार              छः     रु0   21,000.00
7- विविध पुरस्कार             बीस    रु0   11,000.00
8- महर्षि व्यास पुरस्कार      एक    रु0   2,01,000.00
9- महर्षि नारद पुरस्कार      एक    रु0   1,01,000.00

 


6. पुरस्कार योजना के अन्तर्गत प्रतिवर्ष प्रकाशित पुस्तकों तथा अन्य पुरस्कारों की प्रविष्टियों की प्राप्ति हेतु पुरस्कारों का विज्ञापन प्रमुख समाचार पत्रों में निकालने के अतिरिक्त विज्ञापन प्रारुप देश/उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के प्रमुख संस्थाओ को भी भेजा जाय। पुरस्कारार्थियों से संस्थान द्वारा निर्धारित प्रारुप पत्र पर ही प्रस्ताव प्राप्त किया जायेगा। संस्थान द्वारा निर्धारित प्रारुप पत्र पर प्राप्त न होने वाले प्रस्ताव स्वीकार नहीं किये जायेंगे।
          प्रार्थना पत्र पुरस्कारार्थी द्वारा स्वयं या उसके किसी परिचित द्वारा भी प्रस्तुत किया जा सकता है। विज्ञापन में प्रार्थना पत्र/प्रविष्टि संस्थान में प्राप्त होने की एक समय सीमा निर्धारित होगी। निर्धारित अन्तिम तिथि के बाद डाक विभाग अथवा किसी अन्य कारण से संस्थान कार्यालय में विलम्ब से प्राप्त आवेदन पत्र/प्रविष्टि के लिये संस्कृत संस्थान उत्तरदायी नहीं होगा।
          पुरस्कार हेतु विज्ञापित अन्तिम तिथि को कोई आवेदन पत्र ग्रन्थ प्रविष्टि प्राप्त है अथवा नहीं, इस संबंध में प्रेषण एवं सूचना आदि की विशेष परिस्थितियों में इसके अन्तिम निर्णय का अधिकार निदेशक/अध्यक्ष को होगा।


7. कार्यकारिणी समिति प्रत्येक विधा के ग्रन्थों के लिये योग्य विद्वानों विशेषज्ञों/समीक्षकों की सूची का निर्धारण करेगी, जिसका अनुमोदन शासन द्वारा भी कराना आवश्यक होगा। कार्यकारिणी के अभाव में निदेशक की संस्तुति पर माननीय अध्यक्ष द्वारा समीक्षकों/विशेषज्ञों का चयन किया जायेगा। अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी दोनों के अभाव में सभी अधिकार प्रशासनिक विभाग को होगा।


8. पुरस्कारों की संख्या तथा धनराशि में परिवर्तन शासन की सहमति से किया जा सकता है। प्रत्येक विधा में उपयुक्त प्रविष्टियां प्राप्त न होने पर भी पुरस्कार देने की बाध्यता नहीं होगी।


9. मौलिक प्रकाशित संस्कृत पुस्तकें ही पुरस्कार योग्य मानी जायेंगी। नामित पुरस्कारों को छोड़कर अन्य ग्रन्थ पुरस्कार जिनमें संस्कृत के मूल विषय जैसे-योग, तंत्र, ज्योतिष, भारतीय दर्शन, वेद, भाषा विज्ञान, धर्मशास्त्र आदि जिसमें मौलिक चिन्तन प्रस्तुतियाँ भारतीय संस्कृति की विरासत रुप में की गयी है, से संबंधित हिन्दी तथा अन्य भाषाओं के मौलिक चिन्तनपरक ग्रन्थ, जिसमें संस्कृत वाङ्मय/भारतीय संस्कृति की समद्धि होती है, ऐसे ग्रन्थ पुरस्कार हेतु विशेष रुप से विचार्य होगें। संस्कृत प्रश्नोत्तरी (गाइड) सदृश पुस्तकें पुरस्कार योजना में सम्मिलित नहीं की जायेगी।


10. पुस्तक का प्रथम संस्करण ही पुरस्कार के लिये विचारणीय होगा। पूर्व प्रकाशित रचनाओं के संशोधित संस्करण पुस्तक के रुप में प्रकाशित होने पर उसी दशा में पुरस्कार के लिये विचारणीय हो सकता है जब उसकी 60 प्रतिशत सामग्री पूर्व में प्रकाशित न हुयी हो।


11. ऐसी कृति जिसे पहले उत्तर प्रदेश संस्कृत पुरस्कार कर चुका है, पुरस्कार योग्य नहीं मानी जायेगी।


12. संस्कृत संस्थान के वर्तमान अधिकारियों/कर्मचारियों/कार्यकारिणी समिति/सामान्य सभा तथा पुरस्कार समिति के सदस्यों की कृति अथवा अन्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त प्रविष्टी पुरस्कार के लिये विचारणीय नहीं होंगे। यहाँ वर्तमान का तात्पर्य ‘उक्त वित्तीय वर्ष/वर्षों या किसी अंश से है, जिस वित्तीय वर्ष में पुरस्कार हेतु विज्ञापन दिया गया हो अथवा जिस वित्तीय वर्ष में पुरस्कार घोषित किया गया हो’ से है। विशेष पुरस्कार से अधिक धनराशि के पुरस्कारों हेतु किसी भी विद्वान को एक बार से अधिक उसी पुरस्कार के लिये विचार नहीं किया जायेगा। विशेष/विविध पुरस्कारों हेतु उसी विधा में उसी पुरस्कारों के लिये उसी विद्वान की कृति दो वर्ष से पहले विचारणीय नहीं होगी।


13. पुरस्कार हेतु प्राप्त पुस्तकों में से किसी भी पुस्तक/ग्रन्थ के स्तरीय होने के अभाव, पुनरावृत्ति आदि को दृष्टिगत रखते हुये समीक्षा हेतु भेजने से पूर्व भी अस्वीकार किया जा सकता है। इसके लिये निदेशक/अध्यक्ष अपने स्तर से अथवा आवश्यक होने पर सम्वीक्षा समिति भी गठित कर सकेगें। पुरस्कार की प्रत्येक विधा हेतु प्राप्त प्रविष्टियाँ/पुस्तकों के लिये कार्यकारिणी समिति, पुरस्कार समिति, अथवा शासन द्वारा अनुमोदित विशेषज्ञों के पास निदेशक तत्कालिकता को दृष्टिगत रखते हुए यथास्थिति दो समीक्षकों के नामों का चयन कर अध्यक्ष के अनुमोदन से ग्रन्थों को समीक्षार्थ नियमानुसार निदेशक द्वारा गोपनीय ढंग से प्रेषित की जायेगी। पुस्तकांे हेतु प्राप्त प्रविष्टियों के लिये प्रत्येक समीक्षक 100 पूर्णांक के आधार पर मूल्यांकन कर अंक प्रदान करेंगे। इसके पश्चात् दोनों समीक्षकांे द्वारा प्रदत्त अंकों को जोड़कर कुल योग पर विचार-विमर्श के उपरान्त पुरस्कार समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा।


14. पुरस्कार प्रविष्टि के लिये प्रत्येक पुस्तक की 5 प्रतियाँ अपेक्षित होंगी। पुरस्कार हेतु प्राप्त पुस्तकें/प्रकाशक को वापस नही की जायेगी। पुरस्कार प्राप्त पुस्तकें बाद में संस्थान पुस्तकालय में जमा कर दी जायेंगी।


15. पुस्तक की सभी 5 प्रतियों पर लेखक को निम्नलिखित प्रारुप में प्रमाण पत्र देना होगा। अपेक्षित प्रमाण पत्र रहित पुस्तक पुरस्कार के लिये विचारणीय नहीं होगी।

1. पुस्तक का नाम
2. लेखक का नाम
3. जन्म स्थान
4. लेखक का पता
5. उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में रहने का प्रमाण पत्र संलग्न है/ नहीं है.....
6. पुस्तक की विधा/विषय
7. प्रकाशन वर्ष
8. प्रकाशक का नाम व पता
9. किस पुरस्कार के लिये पुस्तक प्रस्तुत है
10. मैं प्रमाणित करता हूँ कि मेरे द्वारा रचित......................................शीर्षक का प्रथम संस्करण प्रथम बार सन्......................में प्रकाशित हुआ है तथा इस पुस्तक का 60 प्रतिशत या उससे अधिक भाग पुस्तक के रुप में इससे पूर्व प्रकाशित नहीं हुआ है।

दिनांक....................                                                                                                            लेखक के हस्ताक्षर........................
                                                                                                                                        पूरा पता ..................................


पुरस्कारों की अर्हता


1- विश्व भारती पुरस्कार-संस्कृत साहित्य के राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान ही इस पुरस्कार के लिए अर्ह होगे। उ0 प्र0 संस्कृत संस्थान द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर उक्त पुरस्कार के लिए आवेदन किया जा सकता है। उक्त पुरस्कार के लिए निर्धारित सूचना प्रपत्र विश्वविद्यालयों, संस्कृत विश्वविद्यालयों, पालि, प्राकृत, संस्कृत संस्थानों के कुलपतियों/विभागाध्यक्षों के अतिरिक्त पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादकों को भी वितरण हेतु उपलब्ध कराये जायेंगे। प्रपत्र का प्रकाशन देश के विभिन्न समाचार पत्रों मे भी प्रकाशित कराया जाता है। प्राप्त नामों पर विश्वभारती पुरस्कार उपसमिति विचार करेगी और प्राप्त प्रस्तावों में से एक नाम की संस्तुति करेगी।


2- महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार-संस्कृत साहित्य में रचनाधर्मिता एवं अपने विशिष्ट कृतित्व के लिए राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऐसे विद्वान को दिया जायेगा जिसने काव्य नाटक आदि मौलिक कृतियांे द्वारा संस्कृत साहित्य के संवर्धन में विशेष योगदान दिया है। यह एक विशिष्ट पुरस्कार है जो संस्थान द्वारा प्रदत्त ‘विश्वभारती‘ तथा ‘विशिष्ट’ पुरस्कारों से भिन्न होगा। इस पुरस्कार को प्रचार प्रसार तथा चयन आदि की सम्पूर्ण प्रक्रिया विश्वभारती पुरस्कार के समान एवं साथ ही विश्वभारती पुरस्कार विशेषज्ञ समिति द्वारा दी नाम संस्तुत किया जायेगा।


3- विशिष्ट पुरस्कार-इस पुरस्कार के लिए वही विद्वान अर्ह हांेगे जिनकी संस्कृत जगत में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार एवं विकास कार्य हेतु निरन्तर विशिष्ट सेवा की न्यूनतम अवधि 20 वर्ष हो अथवा संस्कृत सम्मेलन/संस्कृत सम्भाषण आदि द्वारा संस्कृत के सामाजिक प्रयोग में उल्लेखनीय तथा प्रभावशाली योगदान किया हो।
               पचास हजार से ऊपर के पुरस्कारो में विगत तीन वर्षों के संलग्नक/विवरण/प्रतिनिधि रचनायें किसी विद्वान के बारे में प्राप्त विद्वानों की संस्तुतियो के साथ स्वतः पढे़ जा सकते हैं। ऐसे विवरण तीन वर्षो तक संस्थान में सुरक्षित रखे जायेगें किन्तु विद्वान को अथवा उसके परिचित को निर्धारित प्रारुप का आवेदन अवश्य प्रेषित करना होगा।


4- नामित पुरस्कार

             1-कालिदास पुरस्कार एक
             2-वाणभट्ट पुरस्कार एक
             3-व्यास पुरस्कार एक
             4-शंकर पुरस्कार एक
             5-पाणिनि/सायण पुरस्कार एक
        उपर्युक्त पांचों पुरस्कार लेखकों/प्रकाशकों के दो कलेण्डर वर्ष में प्रकाशित-काव्य ग्रंथ, गद्य, पद्य, दर्शन, पुराण, इतिहास धर्मशास्त्र, वेद, वेदांग तथा व्याकरण विषय की उत्कृष्ट संस्कृत रचनाओं को सम्मानित किये जाने पर विचार किया जायेगा तथा एक पुरस्कार एक व्यक्ति को ही प्राप्त होगा।


5-वेद पण्डित पुरस्कार-प्रत्येक वर्ष पुरस्कार हेतु उत्तर प्रदेश के वेद पण्डितों से आवेदन पत्र आमंत्रित किए जायेगे आवेदक को वेद की किसी भी शाखा का ज्ञान होना चाहिए तथा पूरी संहिता कंठस्थ होनी चाहिए। वेद पण्डित पुरस्कार के निर्णयार्थ परीक्षा संस्थान द्वारा नियुक्त परीक्षकों द्वारा वैदिक श्रोताओं के मध्य होगी। मूल्यांकन हेतु निर्धारित प्रपत्र में उत्तर प्रदेश में जन्म लेने वाले अथवा विगत 10 वर्षों में निवास करने वाले वेद पण्डितो को 10 अंक का अधिमान दिया जायेगा |
          वेद पण्डित पुरस्कार हेतु यदि किसी वर्ष निर्धारित योग्यता के अभ्यथियों की अनुपलब्धता की स्थिति में सर्वसम्मति से निर्णय कर अवशेष पुरस्कार राशि वेद वेदांग से संबंधित नामित पुरस्कारों हेतु निर्धारित कर दी जाय और इसका उल्लेख विज्ञापन में भी करा दिया जाय।
          पुरस्कार समिति यदि एक पुरस्कार हो तो वेद वेदांग को नामित पुरस्कार अथवा दो पुरस्कार रिक्त हों तो उस धनराशि से विशिष्ट पुरस्कार हेतु आवेदित किसी विशिष्ट वेद पण्डित को जो कम से कम 20 वर्ष पूर्व संस्कृत संस्थान का वेद पण्डित पुरस्कार प्राप्त किया हो, उस विद्वान को पुरस्कार से पुरस्कार समिति वेद विशिष्ट पुरस्कार रू0 1,01,000/-का देने हेतु संस्तुत कर सकती है।


6-विशेष पुरस्कार-संस्कृत भाषा में विरचित रचनात्मक कृतियाँ ही विशेष पुरस्कार के लिए विचारणीय होगी। इस वर्ग में एक पुरस्कार पालि तथा प्राकृत में रचित ग्रन्थों के लिए आरक्षित है। यदि पालि तथा प्राकृत में रचित ग्रन्थ उपलब्ध नहीं होंगे तो उस पुरस्कार को संस्कृत भाषा के लिए विचार कर लिया जायेगा।


5. वर्तमान में शासन द्वारा स्वीकृत एवं शत प्रतिशत वित्त पोषित पुरस्कारों की प्रवृत्ति, संख्या एवं धनराशि में वृद्धि शासन की स्वीकृति के उपरान्त हो सकती है।


7-विविध पुरस्कार-विविध पुरस्कार को निम्न वर्गों के लिए वर्गीकृत किया जाता है-

क-साहित्य पुरस्कार      दस
ख-शास्त्र पुरस्कार      छः
ग-बालसाहित्य रचना पुरस्कार      दो
घ-श्रमण पुरस्कार      दो
ये पुरस्कार संस्कृत में रचनात्मक कृतियों तथा संस्कृत के विषयों पर हिन्दी में रचित समीक्षात्मक कृतियों के लिए दिये जायेंगे।


8-महर्षि व्यास पुरस्कार-(एक) रु0 2,01,000/-(दो लाख एक हजार रुपये मात्र)
                                 वेद वेदांग तथा पौराणिक वाङ्मय में रचनाधर्मिता तथा अपने विशिष्ट कृतित्व-व्यक्तित्व से राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऐसे संस्कृत विद्वान को दिया जाएगा, जिन्हांेने अपने मौलिक, समीक्षात्मक लेखन/सम्पादन से वेद वेदांग तथा पौराणिक साहित्य में विशेष योगदान दिया हो। पुरस्कार की पात्रता हेतु आवेदक की आयु 60 वर्ष होनी चाहिए परन्तु अथवा योग्य होने की सि्थति में इसमें शिथिलता का अधिकार चयन समिति का होगा | इसका क्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष होगा।


9-महर्षि नारद पुरस्कार-(एक) रु0 1,01,000/-(एक लाख एक हजार रुपये मात्र )
                                  संस्कृत पत्रकारिता जगत के ऐसे वरिष्ठ पत्रकार को जिन्होंने कम से कम 25 वर्षांे से संस्कृत पत्र-पत्रिकाओं में अपने लेखन/सम्पादन तथा प्रकाशन से संस्कृत पत्र/पत्रिकाओं का राष्ट्रीय स्तर का गौरव प्रदान कराया हो, संस्कृत पत्र/पत्रिकाओं के संस्थापक सम्पादक के साथ ही लेखन (ग्रन्थ) समीक्षा, सम्पादन, अध्यापन कार्य करने वाले विद्वान भी अर्ह होंगे। पुरस्कार की पात्रता हेतु आवेदक की आयु न्यूनतम 60 वर्ष एवं क्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष होगा।
चयन समिति/चयन प्रक्रिया
              पुरस्कार/सम्मान के बारे में विचार विमर्श करने के लिए उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की कार्यकारिणी समिति द्वारा गठित एक लाख या उससे बड़े पुरस्कार के लिए विशेषज्ञ समिति सात सदस्यों की होगी, जिसमें स्थायी सदस्य के रूप में-

1-अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान
2-निदेशक, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान
3-प्रमुख सचिव/सचिव भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, अथवा भाषा विभाग के नामित अधिकारी जो, उपसचिव से ऊँचे स्तर के हो, भी सदस्य होगा इसके अतिरिक्त
4-विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्वान् कुलपति
5-संस्थान के एक लाख से अधिक कम से कम दो वर्ष पूर्व पुरस्कार प्राप्त विद्वानों में से एक एवं
6-ऐसे संस्कृत विद्वान् जो विश्वविद्यालयों में कुलपति तथा संस्कृत के प्रतिष्ठित संस्थानों में निदेशक पद पर कम से कम एक वर्ष तक कार्यरत रहें हो।
      पुरस्कार समिति के निर्णय के लिए 5 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। प्रथम तीन सदस्य के अतिरिक्त वही विद्वान् कम से कम तीन वर्षों तक दुबारा पुरस्कार समिति के सदस्य नहीं होंगे। पचास हजार से बड़े पुरस्कारों के निर्णय में पारदार्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिये समिति को वस्तुनिष्ठ आधारों पर विद्वानों का मूल्यांकन अनिवार्य होगा जिनमें निम्न बिन्दुओं पर समान अंक निर्धारित किए जायेंगें।
1-ग्रंथ लेखन एवं सम्पादन/प्रकाशित एवं पुरस्कृत ग्रंथ     20 अंक
2-संस्कृत सेवा संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार का कार्य, देश विदेशो में तथा अध्ययन अध्यापन कार्य     20 अंक
3-पूर्व पद-विभिन्न विभागाध्यक्षों/विश्वविद्यालयों/संस्कृत संस्थानों से तथा संस्कृत से जुड़े महत्वपूर्ण पद/फैलोशिप     20 अंक
4-ख्याति लोकप्रसिद्धि उपरोक्त क्रमांक 1 से 3 पर रहते हुए अन्यथा ख्याति का उल्लेख शैक्षणिक एवं मानद उपाधियां    20 अंक
5-विशिष्टयाँ-वेददर्शन, न्याय, तन्त्र, साहित्य व्याकरण साहित्यालोचन एवं ज्योतिष आदि की विशेषता आधुनिक संदर्भो में संस्कृत वाड्मय की अनुपयौगिक एवं वैदुष्य वैशिष्ट्य     20 अंक

2-‘समिति द्वारा पुरस्कारों के लिए चयनित नामों का अनुमोदन मा0 मुख्यमंत्री जी से कराया जाना आवश्यक है। मा0 मुख्यमंत्री जी को चयन समिति द्वारा पुरस्कार के लिए चयनित महानुभावों के नामों में संशोधन/परिवर्तन किए जाने का अधिकार निहित होगा।’
उक्त संशोधन शासनादेश सं०. 92/21-3-2010 से 34/2006 दिनांक 16 जून 2010 को शासनादेश सं०. 20/21-3-2015 सं० सं०. 34/2006 दिनांक 05 फरवरी 2015 द्वारा विलोपित कर दिया गया है तथा पुरस्कारों का अनुयोदन मा. अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा |


पुरस्कारों की घोषणा


पुरस्कार समिति द्वारा निर्णीत एवं चयनित पुरस्कारों की घोषणा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के निदेशक द्वारा यथासमय कर दी जायेगी और यथासम्भव प्रत्येक वर्ष संस्कृत दिवस से देवोत्थानी एकादशी के मध्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित कर पुरस्कारों का वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। पुरस्कृत विद्वानों को पुरस्कार के साथ यथा परम्परा ताम्रपत्र, अंगवस्त्र तथा प्रमाण पत्र भी दिया जायेगा। पुरस्कार समिति/कार्यकारिणी समिति की संस्तुति पर शासन के अनुमोदन/सहमति से पुरस्कारों की धनराशि/संख्या में वृद्धि की जा सकेगी।