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कर्मचारी सेवा नियमावली
 
भाग एक
 
   
  • सामान्य


  • 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ


  • 1. यह नियमावली उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान कर्मचारी सेवा नियमावली 2006 कहलायेगी।
    2. यह नियमावली तुरन्त प्रवृत्त होगी।
    3. यह नियमावली संस्थान के उन सभी पूर्णकालिक कर्मचारियों पर लागू होगी, जो इस नियमावली के बनने से पूर्व संस्थान की सेवा में नियुक्त हों अथवा उसके बाद नियुक्त किये जायं, परन्तु संस्थान में प्रतिनियुक्ति पर आये कर्मचारियों पर उनके प्रतिनियुक्ति संबंधी नियम लागू होंगे। परन्तु यह सेवा नियमावली प्रतिनियुक्ति के उन कर्मचारियों पर भी लागू होगी, जो स्वेच्छा से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की सेवा में संविलीन होने की सहमति प्रकट करें और जिन्हें अन्तिम रूप से संस्कृत संस्थान की सेवा में संविलीन कर लिया जायें।


  • 2. परिभाषायें


  • जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो, इस नियमावली में -
    1. संस्थान का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लख्नऊ से है।
    2. शासन  या राज्य सरकार का तात्पर्य उत्तर प्रदेश सरकार से है।
    3. सेवा का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की सेवा से है।
    4. सामान्य परिषद्‌ का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की सामान्य परिषद्‌ से है।
    5. कार्यकारिणी समिति का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की कार्यकारिणी समिति से है।
    6. अध्यक्ष का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की सामान्य परिषद्‌ तथा कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष से है।
    7. निदेशक का तात्पर्य उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के निदेशक से है।
    8. संवर्ग का तात्पर्य संस्थान द्वारा अनुरक्षित किसी सेवा के पदों की संख्या या एक पृथक्‌ इकाई के रूप में स्वीकृत सेवा सम्भाग से है।
    9. निरन्तर सेवा का तात्पर्य अविच्छिन्न सेवा से है, किन्तु इसके अन्तर्गत ऐसी सेवा भी सम्मिलित होगी, जो किसी प्राधिकृत छुट्‌टी के कारण या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन गणना की जाने योग्य अनुपस्थिति के कारण विछिन्न हो गई थी।
    10. कर्मचारी का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो संस्थान की पूर्णकालिक सेवा में हो। इसके अन्तर्गत संस्थान में दैनिक वेतन पर, अनुबन्ध पर या अंशकालिक सेवा में सेवायोजित व्यक्ति सम्मिलित नहीं है।
    11. वेतन का तात्पर्य समस्त भत्तों को छोड़कर मासिक मूल वेतन से है।
    12. सेवा समाप्ति का तात्पर्य अनुशासनिक कार्यवाही में दण्ड स्वरूप की गई या किसी अन्य कारण से संस्थान द्वारा अपने कर्मचारी की सेवाओं की समाप्ति से है, किन्तु इसके अन्तर्गत सेवा निवृत्ति या पद त्याग के कारण सेवा की समाप्ति नहीं है।


  • 3. अन्य प्राविधान


  • 1. नियमावली में परिवर्धन या परिवर्तन द्वारा कोई संशोधन की कार्यकारिणी समिति द्वारा प्रस्ताव पारित करके, सामान्य परिषद्‌ तथा शासन  के अनुमोदन से किया जा सकता है।
    2. नियमावली के नियमों की व्याख्या एवं क्रियान्वयन का अधिकार संस्थान के निदेशक को होगा। इस संबंध में कोई विवाद उत्पन्न होने पर उस विषय में शासन  का निर्णय अन्तिम माना जायेगा।