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कर्मचारी सेवा नियमावली
 
भाग-ग्यारह
 
   
  • शास्ति, अनुशासनिक कार्यवाही और अपील


  • 31. शास्ति


  • 1. किसी कर्मचारी को, जो अपने कर्तव्यों का उल्लंघन करता है या इस सेवा नियमावली द्वारा प्रतिषिद्ध कोई कार्य करता है, के विरूद्ध शासन  द्वारा समय-समय पर निर्गत अनुशासनिक कार्यवाहीं संबंधी आदेशों के अधीन अथवा निम्नलिखित शास्तियों में से किसी एक या अधिक द्वारा दण्डित किया जा सकेगा -


  • क. निन्दा करना
    ख्. वेतन वृद्धि रोकना
    ग. जुर्माना केवल चतुर्थ श्रेणी के किसी कर्मचारी, चपरासी, चौकीदार आदि पर।
    घ. कर्मचारी के आचरण द्वारा संस्थान को होने वाली किसी धन संबंधी क्षति की पूर्णतया या आंशिक रूप से क्षतिपूर्ति करने के लिये वेतन या प्रतिभूति से वसूली।
    ड. कर्मचारी द्वारा मौलिक रूप से गृहीत पद या श्रेणी से अवनति (रिडक्शन इन रैंक)
    च. सेवा से हटाया जाना (रिमूवल) या
    छ. सेवा से पदच्युत (डिसमिसल)


  • 2. दण्ड के आदेश की प्रतिलिपि अनिवार्यतः सम्बद्ध कर्मचारी को दी जायेगी और कर्मचारी के सेवा अभिलेख में इस आशय की प्रविष्टि की जायेगी।


  • 3. निन्दा करने के अलावा कोई भी शास्ति तब तक आरोपित नहीं की जायेगी जब तक कि कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस न दे दी गई हो और वह विर्निर्दिष्ट समय के भीतर उत्तर  देने में असफल रहा हो अथवा उसका उत्तर दण्ड देने वाले अधिकारी द्वारा असंतोषजनक पाया गया हो।


  • 4. किसी कर्मचारी को निलम्बित करने और उसके विरूद्ध अनुशासनत्मक कार्यवाही करने के लिये निदेशक समक्ष प्राधिकारी होंगें।


  • 5. आरोपित कर्मचारी को निदेशक द्वारा अपराध की गंभीरता के अनुसार दण्ड दिया जायेगा। प्रतिबन्ध यह है कि -


  • क. नियम-36 के उनियम (1) के ख्ण्ड (ङ), (च) या (छ) के अधीन कोई शास्ति अनुशासनिक कार्यवाही किये बिना आरोपित नहीं की जायेगी।
    ख. कोई कर्मचारी उस प्राधिकारी से, जिसके द्वारा यह नियुक्त किया गया हो, भिन्न किसी अधिकारी द्वारा हटाया या पदच्युत नहीं किया जायेगा।


  • 6. इ नियमों के अधीन नियम-36 के उपनियम (1) के ख्ण्ड क,ख्,ग,घ में वर्णित शास्तियां आरोपित करने संबंधी निदेशक के आदेश के विरूद्ध प्रत्यावेदन/अपील अध्यक्ष के समक्ष की जा सकेगी, जिनका निर्णय अन्तिम एवं मान्य होगा।


  • 7. नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा कर्मचारी के मौलिक पद या श्रेणी से अवनत किये जाने, सेवा से हटाये जाने अथवा पदच्युत संबंधी शास्ति आरोपित किये जाने पर अपील उत्तर प्रदेश शासन  के संबंधित प्रशासनिक विभाग के सचिव को की जा सकेगी, जिनका निर्णय अन्तिम एवं मान्य होगा।


  • 8. समक्ष प्राधिकारी वेतन वृद्धि रोकने का आदेश देते समय उस अवधि का, जब वह रोकी गई है और भविष्य की वेतनवृद्धियों पर उसके प्रभाव पड़ने या न पड़ने का उल्लेख् करेगा।