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कर्मचारी सेवा नियमावली
 
भाग-छः
 
   
  • सेवाआरम्भ, परिवीक्षा, स्थायीकरण, ज्येष्ठता ओैर सेवानिवृत्ति


  • 17. सेवा का आरम्भ 


  • संस्थान के कर्मचारियों की सेवायें कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आरम्भ होगी।
    यदि कोई कर्मचारी अपराह्‌ण में सेवा आरम्भ करता है, तो उसकी सेवायें अगले दिन के पूर्वाह्‌ण से आरंभ मानी जायेगी।


  • 18. परिवीक्षा


  • 1. स्थायी पदों के विरूद्ध नियमित रूप से नियुक्त किये जाने अथवा पदोन्न्त किये जाने पर संबंधित कर्मचारी को एक वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जायेगा। नियुक्ति प्राधिकारी उसी पद पर अथवा संवर्ग में सम्मिलित किसी समकक्ष या उच्चतर पद पर स्थानापन्न या अस्थायी रूप से की गई निरन्तर सेवा की परिवीक्षा अवधि की संगणना के प्रयोजनार्थ उपयोग कर सकता है।


  • प्रतिबन्ध यह है कि नियुक्ति प्राधिकारी, उन पर्याप्त कारणों से, जो अभिलिखित किये जायेंगें, व्यक्ति विशेष के मामले में परिवीक्षा अवधि को, जितना वह उचित समझे, ऐसी अवधि के लिये, जो कुल दो वर्ष से अधिक न हो तथा एक बार एक वर्ष से अधिक न हो, बढ़ा सकता है।


  • 2. यदि परिवीक्षा अवधि तथा बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि के अंत में या उसके पूर्व किसी समय यह प्रतीत हो कि उस व्यक्ति ने कार्य सीखने के लिये दिये गये अवसर का पर्याप्त उपयोग नहीं किया है या वह अन्य प्रकार से संतोष देने में असमर्थ रहा है तो उसे सेवा से हटा दिया जायेगा और यदि उस पर उसकी पदोन्नति द्वारा नियुक्ति की गयी हो तो उसे उस पद पर प्रत्यावर्तित कर दिया जायेगा, जिससे उसकी पदोन्नति की गयी थी। परिवीक्षा अवधि या बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि के मध्य या उसके अंत में सेवा से हटाये गये किसी व्यक्ति को तब तक कोई प्रतिकर नहीं दिया जायेगा, जब तक कि उसके मामले में प्रयोज्य किसी विधि के अनिवार्य उपबंधों के अधीन वह उसका हकदार न हो।


  • 3. सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त परिवीक्षाधीन कर्मचारी की सेवा समाप्ति के समय नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा कम से कम 30 दिन की नोटिस या 30 दिन के वेतन के बराबर धनराशि दी जायेगी। वेतन के साथ महंगाई भत्ता भी देय होगा। इसी प्रकार यदि कोई परिवीक्षाधीन कर्मचारी सेवा त्याग करना चाहें,  तो वह लिखित रूप से 30 दिन की नोटिस देगा या 30 दिन के वेतन एवं मंहगाई भत्ते के बराबर धनराशि वापिस करेगा। संस्थान की कार्यकारिणी समिति द्वारा ऐसे कर्मचारी को नोटिस अथवा एक मास के वेतन की वापसी के प्राविधान से मुक्त भी किया जा सकता है। परिवीक्षा अवधि या बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि में किसी पदोन्नत किये गये कर्मचारी को उसके मूल पद पर नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा किसी भी समय बिना कारण बताये प्रत्यावर्तित किया जा सकता है।


  • 19. स्थायीकरण


  • कोई परिवीक्षाधीन व्यक्ति, यथास्थिति, परिवीक्षा अवधि या बढ़ाई गई परिवीक्षा अवधि के अंत में अपने पद पर स्थायी कर दिया जायेगा।


  • 20. ज्येष्ठता


  • सेवा में किसी श्रेणी के पद पर ज्येष्ठता मौलिक रूप से नियुक्ति के दिनांक से अवधारित की जायेगी, और यदि दो या अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्त किये जायें तो उस क्रम में अवधारित की जायेगी, जिसमें उनके नाम नियुक्ति आदेश में रखे गये हों।
    1. सेवा में सीधे नियुक्त किये गये व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी, जो चयन समिति द्वारा चयन के समय अवधारित की जाय।
    2. सेवा में एक साथ पदोन्नति द्वारा नियुक्त किये गये व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी, जो पदोन्नति के समय उनके द्वारा रिक्त किये गये मौलिक पद पर रही है।


  • टिप्पणी -


  • सीधी भर्ती से नियुक्त किया गया कोई अभ्यर्थी अपनी ज्येष्ठता खो सकता है, यदि रिक्त पद पर नियुक्त किये जाने पर वह निर्धारित समय के भीतर विधिमान्य कारणों के बिना कार्यभार ग्रहण करने में विफल रहे। कारणों का विधि मान्यता के संबंध में नियुक्ति प्राधिकारी का निर्णय अन्तिम होगा।


  • 21. सेवानिवृत्ति


  • संस्थान के समूह 'घ' के कर्मचारियों को छोड़कर शेष कर्मचारियों की सेवा निवृत्ति की आयु 58 वर्ष होगी। किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति का दिनांक मास की पहली तिथि के बाद हो तो उसकी सेवा निवृत्ति की प्रभावी तिथि उस मास के अन्तिम दिन होगी।